हौज़ा न्यूज़ एजेंसी के अनुसार निम्नलिखित रिवायत “वसाइल उश शिया” से ली गई है। इस रिवायत का पाठ इस प्रकार हैः
امیرالمؤمنین امام علی علیهالسلام:
أَدِقُّوا أَقْلَامَکُمْ، وَقَارِبُوا بَیْنَ سُطُورِکُمْ، وَاحْذِفُوا عَنِّی فُضُولَکُمْ، وَاقْصِدُوا الْمَعَانِیَ، وَإِیَّاکُمْ وَالْإِکْثَارَ، فَإِنَّ أَمْوَالَ الْمُسْلِمِینَ لَا تَحْتَمِلُ الْأَضْرَارَ.
अमीरुल मोमिनीन इमाम अली (अ) ने फ़रमाया:
“अपनी कलमों की नोकें तेज़ रखो, अपनी पंक्तियों को एक-दूसरे के करीब लिखो, मेरे लिए अतिरिक्त बातें हटा दो, केवल आवश्यक अर्थ को लिखो और ज़्यादा लिखने से बचो, क्योंकि मुसलमानों का माल नुकसान और बर्बादी को सहन नहीं कर सकता।”
वसाइल उश शिया, भाग 17, पेज 404
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